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Friday, June 29, 2007

राष्ट्रपती चुनाव, क्या यह मज़ाक है? Indian presidential elections, is this a joke?

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पहले तो एक ऐसा प्रधान मंत्री हम पर थोप दिया गया, जो एक कत्पुत्ली से कम नहीं प्रतीत होता है (मैं पद को पुरा सम्मान देता हूँ)। और अब एक ऐसे व्यक्ति को हमारे पर थोपा जा रहा है, जिसका पिछला कार्य-निष्पादन और भूत संदेह से भरा है। जिनके द्वारा चलाया हुआ बैंक डूब गया है, जिनके परिवार ने करोड़ों का घोटाला किया हो, तथा उनके भाई पर कत्ल जैसा घिनोना आरोप है (खबरों के माध्यम से)। प्रतिभा पाटिल एक ऐसा मध्यमार्ग है जिसे कॉंग्रेस, लेफ्ट (उलटी), सपा, तथा अन्य दल नारी उत्थान के नाम पर एक ऐसा मोहरा राष्ट्रपती भवन में बिठाना चाहते है, जिसकी खासियत, निष्पादन, और पराक्रम यही है, कि वह सोनिया गाँधी के प्रति निष्ठावान है, और चाहे राष्ट्रभक्त हो ना हो, परंतु "सोनिया"भक्त जरुर है।

श्रीमान कलाम जैसा राष्ट्रपती, फिर नहीं होगा। सारा देश चाहता है कि वह इस पद पर कायम रहें, पर कामचोर कॉंग्रेस और आयात कि हुई विदेशी ईवंजलिक डिक्टेटर सोनिया गाँधी यह होने नहीं देंगी, इस खुंदक में कि यह वही कलाम है, जिन्होंने सोनिया गाँधी को प्रधान मंत्री कि शपत के लिए आमंत्रित नहीं किया था और वह "ऑफिस ऑफ़ प्रोफित बिल" जो इस देश के संविदान का मज़ाक है, उसे वापिस भेज दिया था। २००९ के लोक सभा चुनाव में जाने क्या परिणाम आए, इसी लिए यह नाटक हो रहा है। हम तंग आ गए है इस परिवार से, पता नहीं कब इनसे छुट्टी मिलेगी। इतना भुगतने के बाद इतना तो पक्का है, कि यूपीए के किसी भी दल के लिए हम मत नहीं देंगे, वरना यह तो इस देश को और ५०० साल पीछे ले जाएँगे।